प्रेम परिणाम

प्रेम परिणाम का क्यों ही चिन्तन करें,
जब समर्पण हृदय का किया जा चुका।
प्रश्न सारे लिखें या उन्हें छोड़ दें,
अक्ष से जब है उत्तर दिया जा चुका।।....

इस हृदय देहरी पे प्रणय के वचन,
सारगर्भित कथन से ही अनुबंध दो।
स्याह आंखों की गरिमा का जादू चला,
प्रेम पथ पर प्रिये! बस मेरे संग हो।
यज्ञ की वेदिका पर बनो संगिनी,
वाग का दान मुझको दिया जा चुका।।.........

ओंस के जलकणों से सजी है धरा,
कुमदनी रैन में है सजी जा रही।
स्वच्छ आकाश में चांद बेताब है,
भूमि पर चकवे कि मति जली जा रही।
धैर्य टूटे किसी का भी चिन्ता नहीं,
निज मिलन का दिवस तय किया जा चुका।।........

कुछ अधूरे गए ख्वाब छोड़ो उन्हें,
बेबसी इतनी हमको नहीं चाहिए।
हो प्रभावित अगर भाव निर्णय कहीं,
शोख महताब ऐसी नहीं चाहिए।
चाहिए जो मुझे सब बसा आप में,
उस विधाता के द्वारा किया जा चुका।।.
Arun Kumar Shukla

प्रेम परिणाम | We The Sukhanwar