नज़र जबसे बा-होश दीदार में है
लबों पर फ़क़त जाम गुफ़्तार में है
कहो यार उसको ज़रा लाल पहने
यहाँ बैंगनी साड़ी तकरार में है
नुमाई नहीं इश्क़ में कुछ कभी भी
मोहब्बत ख़ुदा बनके दस्तार में है
शबाब-ए-गुरेज़ाँ कमर तोड़ देगी
हिफ़ाज़त सुनो यार इज़हार में है
तिरे होंठ पे फूल शर्मा रहे सब
मने अब कमर गाल गुलजार में है
कुनू मन लगाकर पढ़ाई करो बस
तिरा इश्क तकमील अफ़्कार में है
Kunal kumar