है दिल नादान ये क्या चाहता है
तुम्हें अपना बनाना चाहता है
तिरा बिमार इतना चाहता है
हर इक ग़म का मदावा चाहता है
ग़मों को अब भुलाना चाहता है
तुम्हें दिल में बसाना चाहता है
ना कर सय्याद तू अब क़ैद इस को
परिन्दा उड़ के जाना चाहता है
मुझे सहरा में तन्हा छोड़ फ़ैसल
वो अब रस्ता बदलना चाहता ह
Faisal Qadri Gunnauri