Faisal Qadri Gunnauri

मुझ को अंदाज़ तुम्हारे नहीं अच्छे लगते
चुपके-चुपके ये इशारे नहीं अच्छे लगते

चाँद सूरज ये सितारे नहीं अच्छे लगते
तुम नहीं हो तो नज़ारे नहीं अच्छे लगते

देख यूँ हिज्र के मारे नहीं अच्छे लगते
आशिक़ों को ये ख़सारे नहीं अच्छे लगते

हाकिम-ए-वक़्त ना दे झूठी तसल्ली हम को
ये तिरी भीड़ ये नारे नहीं अच्छे लगते

भर दे दामान-ए-तलब कब से खड़े हैं दर पर
हम यूँ दामन को पसारे नहीं अच्छे लगते

फूल सा चेहरा है क़ातिल सी अदाएँ तेरी
तेरे लहजे में शरारे नहीं अच्छे लगते

वे वफ़ाओं से मुझे ऐसे है नफ़रत फ़ैसल
जैसे मोज़ों को किनारे नहीं अच्छे लगते
Faisal Qadri Gunnauri

Faisal Qadri Gunnauri | We The Sukhanwar