रह-ए-ग़फ़लत में छोड़ आये हैं घर हम
सफ़र से लौट कर जाएँ किधर हम
ख़बर उस सीम-तन की रखते रखते
हुए जाते हैं ख़ुद से बे-ख़बर हम
दिखाओ मत क़फ़स में आसमाँ को
कहीं नोचे ना अपने बाल-ओ-पर हम
निहाँ वो अपने दिल में ही कहीं है
तलाश आये हैं जिस को दर-ब-दर हम
जला दें एक सिगरेट से तुम्हारी?
सभी तस्वीर ऐ जान-ए-जिगर हम ?
नहीं मिलता कोई नाम-ओ-निशां तक
मिटे हैं इश्क़ में ये किस क़दर हम
लिए जाते हैं अपने साथ साहिल
तुम्हारी आँख से बहते गुहर हम
Shashank Singh Thakur "SAAHIL"