दूर से देख कर मुस्कुराती हो क्यों
पास आता हूं तो दूर जाती हो क्यों
शोख नटखट अदाओं से हमको सनम
रात दिन इस तरह से सताती हो क्यों
आजा तुझपे रुबाई लिखूं प्यार की
ज़िन्दगी की कमाई लिखूं प्यार की
चांद तारे तो तुझको मैं दे ना सकूं
टूटे दिल की दुहाई लिखूं प्यार की
तुझको पाने में सारी उमर खो गई
राह हमको मिली रहगुज़र खो गई
तेरी यादों में यूं गुनगुनाता रहा
कुछ लिखा ही नहीं औ बहर खो गई
फोन औ तार का यूं जमाना चला
झूठी बातों का भी आना जाना चला
एक से ही नहीं एक से हैं अधिक
बात करने का अब तो तराना चला
साथ में मिल के देखे थे सपने बहुत
पर विरह की अगन में हैं तपने बहुत
ज़िन्दगी की डगर होगी इतनी कठिन
राह के आधे कांटे हैं अपने बहुत
Bajrangi Lal