धरा का स्खलन भारी पड़ेगा
दुबारा उत्खनन भारी पड़ेगा
समन्दर का अभी गौना हुआ है
किनारे पर मिलन भारी पड़ेगा
कहाँ तुम गोपियों को जानते थे
कहा था न गमन भारी पड़ेगा
पुराने दिन पुनः अँखुआ रहे हैं
नये दिन का सृजन भारी पड़ेगा
चले जाना नियति है मान जाओ
चले जाओ वरन भारी पड़ेगा
अभी तो शेष है गहनों की थिरकन
बिना गहना बदन भारी पड़ेगा
अतुल तुम ढीठ होते जा रहे हो
गुलाबी यह व्यसन भारी पड़ेगा
Atul Kumar Rai