सब्र मेरा आज़माना चाहते हो
तुम भी अब मुझको सताना चाहते हो
घर बचाना भी मयस्सर अब नहीं है
और तुम हो घर सजाना चाहते हो
दिल में तो कर ही दिया तुमने अंधेरा
घर में तुम शम्में जलाना चाहते हो
मुझको अब चुप भी ज़रा रहने दो तो तुम
बात क्यों आगे बढ़ाना चाहते हो
नाम तक मेरा कहीं जिसमें न आए
तुम कोई ऐसा फसाना चाहते हो
Anmol