Seema Pandey Mishra

ख़ामुशी को बुज़दिली समझा न जाए
सादगी को मुफ़लिसी समझा न जाए

डालता उल्फ़त दिलों में वो ख़ुदा ही
इश्क़ को आवारगी समझा न जाए

एहतियातन बज़्म में देखा न उनको
कहिए उनसे बेरुख़ी समझा न जाए

दौर -ए-गर्दिश ने सिखाया उस सबक को
रौशनी है तीरगी समझा न जाए

मुस्कुराके ग़म छुपा लेती हूॅं सबसे
इस दिखावे को ख़ुशी समझा न जाए

मौज में आये तो जाने क्या छुपा ले
इस समंदर को नदी समझा न जाए
Seema Pandey Mishra