Sani Singh

कर रहे भावनाओं का व्यापार सब,
कोई रिश्ता निभाना नहीं चाहता।

एक छोटी सी गलती पे नाराज़गी,
भूल जाती है सारे ही उपकार को।
पूर्व के सारे सम्मान को भूल कर,
याद रखती है दुनिया तिरस्कार को।।
आज संशय में डूबा ये सारा जगत,
प्रेम को हल बनाना नहीं चाहता।

दोस्त बनते यहां ओहदे देखकर,
अब निरर्थक कोई साथ देता नहीं।
आज के दौर में असफल व्यक्ति के,
हाथ में कोई भी हाथ देता नहीं।।
स्वार्थ, जीवन में आने का आधार है,
कोई निःस्वार्थ आना नहीं चाहता।

प्रेम हो या कि सम्बन्ध या दोस्ती,
मायने ही नहीं आदमी के लिए।
आजकल हो गए हैं ये नाजुक बहुत,
टूट जाते हैं दो गज जमीं के लिए।।
किंतु संबंध को कोई भी आदमी,
प्राथमिकता में लाना नहीं चाहता।
Sani Singh

Sani Singh | We The Sukhanwar