Bajrangi Lal

गाल गुलालन सो रँगिहौं धरि चूनर में मरिहौ पिचकारी
अंगन में सब रंग लगावत भूलि गये हम तो सुधि सारी

चूम लियो जब गाल बेहाल हो फूलि गई मन की फुलवारी
होश कहां मदहोश हुए वह भी सब लाज समाज बिसारी
Bajrangi Lal