तेरी राह में क़ैदखाने पड़ेंगे
मगर तुझको ख़तरे उठाने पड़ेंगे
अभी ख़ून से शेर लिखने है तुझको
क़लम हड्डियों के बनाने पड़ेंगे
कहीं सो न जाए सुबह के मुसाफ़िर
तुझे रात-भर गीत गाने पड़ेंगे
अगर तू ही चुप हो गया इस सदी में
हमें रोज़ आँसू बहाने पड़ेंगे
ये महफ़िल है इसका तकाज़ा यही है
तुझे दर्द अपने भुलाने पड़ेंगे
तू शायर है, मुफ़लिस है, ख़ुद्दार भी है
तुझे ग़म से रिश्ते निभाने पड़ेंगे
दियों से न मिट पायेगा यह अँधेरा
हमें दिल भी अपने जलाने पड़ेंगे
Dr. Urmilesh Shankhdhar