दुनिया के सारे तौर तरीक़े बदल गये
ग़ैरों की बात क्या हो जब अपने बदल गये
वो संग दिल जो लोग थे कैसे बदल गये ?
अलफ़ाज़ नरम हो गये लहजे बदल गये
हर सिम्त नफ़सी नफ़सी का आलम है दहर में
इन्सान इस ज़माने के कितने बदल गये
कुछ दूर तक वो साथ हमारे चले मगर
इक मोड़ ऐसा आया के रस्ते बदल गये
Faisal Qadri Gunnauri