अगर दर्द बनता न गीत

अगर दर्द बनता न गीत
कैसे तुम मिलते ओ मीत
हार सताती रहती मुझको
कभी न होती मेरी जीत
अगर दर्द बनता न गीत

कैसे मेरे मन का होता
सुख की नींद मैं कैसे सोता
मुझे न होती ख़ुद से प्रीत
अगर दर्द बनता ना गीत

हृदय भूमि तपती ही रहती
नयनों से बस बारिश होती
कठिन समय था गया जो बीत
अगर दर्द बनता न गीत
Shravan Kumar