Aatish Indori

मोहब्बत के फ़साने में कहाँ से आ गए हो तुम
ये नुक्ता-चीं, छलावे में कहाँ से आ गए हो तुम

यहाँ हर सू मोहब्बत का छलावा है दिखावा है
फ़रिश्ते इस ज़माने में कहाँ से आ गए हो तुम

चले थे जोड़ने तुम तो ज़माने भर की दौलत को
ग़मों के इस ख़ज़ाने में कहाँ से आ गए हो तुम

बहुत से 'ऐब थे तुम में फ़रेबी थे शिकारी थे
मोहब्बत के छलावे में कहाँ से आ गए हो तुम

ठिकाना है ये उनका जो लुटा देते हैं जान-ओ-दिल
मोहब्बत के ठिकाने में कहाँ से आ गए हो तुम
Aatish Indori