माँ ईश्वर के रूप में ,है अनुपम उपहार
सकल तीर्थ माँ के चरण,यही स्वर्ग का द्वार।।
शब्द मुझे मिलते नहीं,माँ का लिखूँ बखान।
छोटा सा यह शब्द ही,कर दे भव से पार।।
माँ के रिश्ते का नहीं,कोई कहीं विकल्प।
शीतल चंदन छाँव सी,है वात्सल्य अपार।।
विधना तेरे लेख का,यह कैसा अध्याय।
संतानों पर बोझ है,बूढ़ी माँ का प्यार।।
जीवन भर करते रहें,जननी का सम्मान।
उन्नति चूमे देहरी, सुखी रहे परिवार।।
Archana Dwivedi