INAYAT ALI CHISHTI

तुम से जब हम–कलाम होते हैं
सारे मुद्दे तमाम होते हैं

जो तेरे क़दमों में गिर जाते हैं
वो ही आली मक़ाम होते हैं

वो कभी जीत ही नहीं सकते
घोड़े जो बे-लगाम होते हैं

मेरी गुफ़्तार मुहब्बत है मेरी
वरना मुझको भी काम होते हैं

सरफ़राज़ी उन्हीं को मिलती है
जो तुम्हारे ग़ुलाम होते हैं

बोलते हैं तो बोलते हैं वही
और हम ला-कलाम होते हैं

इश्क़ मिस्ल-ए-कशीदाकारी है
इसमें बारीक काम होते हैं

राह-ए-उल्फ़त में 'इनायत' कुछ लोग
ताइर-ए-ज़ेर-ए-दाम होते हैं
INAYAT ALI CHISHTI

INAYAT ALI CHISHTI | We The Sukhanwar