Faisal Qadri Gunnauri

गरचे औलाद बन के बैठे हैं
फख़्र ए अजदाद बन के बैठे हैं

तुम भी बन जाओ इश्क़ में शीरी
हम तो फरहाद बन के बैठे हैं

बन के बैठे हैं वो सरापा ग़ज़ल
और हम दाद बन के बैठे हैं

तू अगरचे हमें भुला बैठा
हम तिरी याद बन के बैठे हैं

पुर फितन दौर है बचे रहना
लोग जल्लाद बन के बैठे हैं

जिन को आती है सिर्फ़ चर्बा गरी
वो भी उस्ताद बन के बैठे हैं

कैसे माइल न हो कोई फ़ैसल
वो परीज़ाद बन के बैठे हैं
Faisal Qadri Gunnauri

Faisal Qadri Gunnauri | We The Sukhanwar