तेरी आदत में लौट कर आए
अपनी क़िस्मत में लौट कर आए
भर गया दिल किसी की सोहबत से
हम मोहब्बत में लौट कर आए
फिर पलट कर नहीं गए घर को
जब हक़ीक़त में लौट कर आए
जो मुसाफ़िर थे ऐन मौक़े पर
वक़्त-ए-रुख़सत में लौट कर आए
ज़िंदगानी को ये समझ आया
हम अज़िय्यत में लौट कर आए
देखने के लिए भी ख़ुद को हम
वक़्त-ए-फ़ुर्सत में लौट कर आए
एक इंसान में कई इंसान
मेरी हिम्मत में लौट कर आए
मन ही मन जा चुके थे दुनिया से
तेरी चाहत में लौट कर आए
दोस्ती हो बहाल दुश्मन से
इश्क़ आदत में लौट कर आए
वापसी थी नहीं कहानी में
लोग गफ़लत में लौट कर आए
मंडियों में गए थे मँगनी हम
ऊँची क़ीमत पे लौट कर आए
देख कर तो गए ही थे दुनिया
क्यूँ मुसीबत में लौट कर आए
लौट आए ज़मीन पर अपने
मिश्र जन्नत में लौट कर आए
Nivedan Mishra