Nivedan Mishra

तेरी आदत में लौट कर आए
अपनी क़िस्मत में लौट कर आए

भर गया दिल किसी की सोहबत से
हम मोहब्बत में लौट कर आए

फिर पलट कर नहीं गए घर को
जब हक़ीक़त में लौट कर आए

जो मुसाफ़िर थे ऐन मौक़े पर
वक़्त-ए-रुख़सत में लौट कर आए

ज़िंदगानी को ये समझ आया
हम अज़िय्यत में लौट कर आए

देखने के लिए भी ख़ुद को हम
वक़्त-ए-फ़ुर्सत में लौट कर आए

एक इंसान में कई इंसान
मेरी हिम्मत में लौट कर आए

मन ही मन जा चुके थे दुनिया से
तेरी चाहत में लौट कर आए

दोस्ती हो बहाल दुश्मन से
इश्क़ आदत में लौट कर आए

वापसी थी नहीं कहानी में
लोग गफ़लत में लौट कर आए

मंडियों में गए थे मँगनी हम
ऊँची क़ीमत पे लौट कर आए

देख कर तो गए ही थे दुनिया
क्यूँ मुसीबत में लौट कर आए

लौट आए ज़मीन पर अपने
मिश्र जन्नत में लौट कर आए
Nivedan Mishra

Nivedan Mishra | We The Sukhanwar