Shivsagar Sahar

दबा,कुचला कहीं बिखरा मिला है
खिले हर फूल को धोका मिला है

पिता के कांधे पर बैठा हुआ हूँ
गगन छूने का इक मौक़ा मिला है

बरामद हो गई है लाश उसकी
नदी के पास ही जूडा मिला है

किसी की लग रही है कोख सूनी
किसी का खेत में बच्चा मिला है

भटकने का यही इक फ़ायदा था
अलग मुझको नया रस्ता मिला है

उदासी बेचनी अद्भुत कला है
मगर शाइर को ये पेशा मिला है
Shivsagar Sahar