तुम्हारे नाम से हमको महकना है, महकने दो
उसी पहचान से हमको चमकना है, चमकने दो
तुम्हें मतलब नहीं इस से कहाँ पर कौन मरता है
मुझे हर एक सीने में धड़कना है, धड़कने दो
बहुत रोका मुझे, अब और सुनना ही नहीं मुझको
अगर दिल आज दोबारा मचलता है, मचलने दो
नहीं रुकती समय की चाल मेरे या किसी ख़ातिर
नज़र भर देख लो फिर यदि बिछड़ना है, बिछड़ने दो
सभी घर की कहानी हो गई है आज बँटवारा
किसी हद पर अगर झगड़ा सुलझता है, सुलझने दो
अगर साँसे दिए हैं राम तो गुणगान भी कर लो
किसी भी हाल में ये मन सुधरता है, सुधरने दो
कहाँ मैं गीत ग़ज़लों में तुम्हारा नाम ले आया
यहाँ कुछ लोग थोड़ा सा समझते हैं, समझने दो
अभी देवेश के सिर पर बहुत से बोझ हैं घर के
अभी ये शौक़ के पौधे उखड़ते हैं, उखड़ने दो
देवेश त्रिपाठी