गुफ़्तार से भी ज़हर उगलते हैं लोगगिरगिट की तरह रंग बदलते हैं लोग असलाफ़ के रस्ते को पसे पुस्त कियाअब राह पे गुमराही की चलते हैं लोगFaisal Qadri Gunnauri