Faisal Qadri Gunnauri

रस्ते में छोड़े जाता है ए राहबर कहाँ
पहुँचा मुझे या बतला के है मेरा घर कहाँ

गुज़रे हैं कैसे दिन हुयीं रातें बसर कहाँ
हम पे जो गुज़री हिज्र में तुम को खबर कहाँ

गुज़रेगी उम्र पूरा ना हो पायेगा कभी
किस्सा ग़मـएـहयात का है मुख्तसर कहाँ

हर वक़्त वो तो जलवा फिगन दिल मैं हैं मिरे
नादान हूँ मैं ढूंढ रहा हूँ ! किधर , कहाँ

बे खौफ़ राहـएـइश्क़ में दीवाना चल दिया
मन्ज़िल की जूस्तजू है तो खौफ़ ओ ख़तर कहाँ

राहों की कुछ ख़बर है ना मन्ज़िल से आशना
फिरता है ए जूनूँ यूँ लिए दर बदर कहाँ

भर दे जो ज़ख्मـएـदिल को है ऐसा मरहम कोई ?
मिलती है ज़ख्मـएـदिल की दवा चारागर कहाँ ?

कामिल नहीं है शायद अभी मेरी आशिकी
होता है मेरी बातों का उन पर असर कहाँ

सोज़ـएـग़मـएـहयात ने जीने नहीं दिया
फ़ैसल सूकून हम को मिला उम्र भर कहाँ
Faisal Qadri Gunnauri