कहने को एक शख़्स ही सारा जहान है
वरना तो सारी दुनिया ही कच्चा मकान है
मुझको वही हसीन पसंद आई शहर में
मशहूर है जो सबसे बड़ी बद-ज़बान है
उसने निभाई रस्म-ए-वफ़ा चंद रोज़ तक
बाक़ी तो मेरे सब्र की ही दास्तान है
तस्कीन-ए-क़ल्ब और लताफ़त से गुफ्तगू
यानी हमारे दरमियां उर्दू ज़बान है
Waseem Siddharthnagari