ये जंग कोई खेल तमाशा नहीं है दोस्त
ये शाम है वो जिसका सवेरा नहीं है दोस्त
दोनों ही सम्त अपने ही लोगों के हैं मकॉं
दोनों ही सम्त जिसके उजाला नहीं है दोस्त
ये दौर है निफ़ाक़ का पर मैंने अब तलक
चेहरे पे कोई चेहरा लगाया नहीं है दोस्त
इक बात तुझसे आज चलो कह ही देता हूं
तुझसा फलक में कोई सितारा नहीं है दोस्त
खुद की लड़ाई खुद ही तुम्हें लड़नी है वसीम
कोई यहां किसी का सहारा नहीं है दोस्त
Waseem Siddharthnagari