Waseem Siddharthnagari

दुआ करता हूँ मैं इस दौर का मंज़र बदल जाए
सितमगर ख़ुद ही अपनी आग के शोलों में जल जाए

मैं दुश्मन को बुरा कहने से पहले सोच लेता हूँ
कहीं ऐसा न हो फिर दोस्त से बेहतर निकल जाए

सजा ले ख़ुद को तू फ़ौरन हसीं की धूप से वरना
जवानी का जो सूरज है अचानक ये न ढल जाए

ग़लत ख़बरों को सुनता हूँ छलक जाते हैं आँसू ख़ुद
कहीं ऐसा न हो फिर मुल्क में दहशत मचल जाए

मेरे नज़दीक अच्छी मौत है उस शख़्स की जिसकी
ज़बाँ पे ज़िक्र रब जारी रहे और जाँ निकल जाए

तक़ाज़ा होशमंदी का न मर दुनिया की दौलत पर
न दौलत, ज़र, ज़मीं जाए फ़क़त तेरा अमल जाए

अमीरों यूँ न इतराओ कभी तुम अपनी दौलत पर
अजल इक नाग है समझो न जाने कब निगल जाए
Waseem Siddharthnagari

Waseem Siddharthnagari | We The Sukhanwar