इक आरज़ू थी वो भी अधूरी ही रह गई
अब तो कहानी मेरी कहानी ही रह गई
निकले थे शहर ख़्वाब को तकमील करने हम
वापस हुए जो घर तो जवानी ही रह गई
सर अपना उसके शाने पे क्या रक्खा थोड़ी देर
गोया के धड़कनों की रवानी ही रह गई
जिस मोड़ पे था मुझको कभी उसका इंतिज़ार
उस मोड़ पे वो याद पुरानी ही रह गई
उसने कहा था साथ निभाएँगे उम्र भर
वो बात सिर्फ़ उसकी ज़बानी ही रह गई
Waseem Siddharthnagari