Aatish Muradabadi

यूँ हिरासाँ उस का दिल है दोस्तों के दरमियाँ
रात जैसे हो गई हो दुश्मनों के दरमियाँ

इस अँधेरी रात में जुगनू नज़र आते नहीं
चाँद ओझल हो गया है बादलों के दरमियाँ

संग-दिल हैं सब यहाँ पर हम किसे अपना कहें
बज़्म में तन्हा सा हूँ मैं नफ़रतों के दरमियाँ

रुख़ से पर्दा जब उठा तो सब हक़ीक़त खुल गई
चाँद सा मुखड़ा भी इक है ज़ालिमों के दरमियाँ

होश-मंदी है ज़रूरी मौसमों को देख कर
कुछ भँवर भी उड़ रहे हैं तितलियों के दरमियाँ

देख लो तक़दीर भी नाकाम हो कर रह गई
आज नासेह आ फँसा है हाजियों के दरमियाँ
Aatish Muradabadi

Aatish Muradabadi | We The Sukhanwar