यूँ हिरासाँ उस का दिल है दोस्तों के दरमियाँ
रात जैसे हो गई हो दुश्मनों के दरमियाँ
इस अँधेरी रात में जुगनू नज़र आते नहीं
चाँद ओझल हो गया है बादलों के दरमियाँ
संग-दिल हैं सब यहाँ पर हम किसे अपना कहें
बज़्म में तन्हा सा हूँ मैं नफ़रतों के दरमियाँ
रुख़ से पर्दा जब उठा तो सब हक़ीक़त खुल गई
चाँद सा मुखड़ा भी इक है ज़ालिमों के दरमियाँ
होश-मंदी है ज़रूरी मौसमों को देख कर
कुछ भँवर भी उड़ रहे हैं तितलियों के दरमियाँ
देख लो तक़दीर भी नाकाम हो कर रह गई
आज नासेह आ फँसा है हाजियों के दरमियाँ
Aatish Muradabadi