Nivedan Mishra

करता रहता हूँ मैं सफ़र मुझ में
वक़्त कहता है तू ठहर मुझ में

तेरी बातें ख़्याल तेरे ख़्वाब
तेरे होने का है असर मुझ में

तेरी नस-नस में मैं उतर जाऊं
मेरी आँखों से यूँ उतर मुझ में

रात भर मेरे काम आता है
तेरा रक्खा हुआ सहर मुझ में

मैं नहीं हूँ तो कौन है अंदर
किसकी बातों का है असर मुझ में
Nivedan Mishra

Nivedan Mishra | We The Sukhanwar