ऐसा दो माँ वरदान देश प्रेम हो प्रधान
मेरी हर कविता को प्रान देदो शारदे
लय गति यति दे दो छंदों की सुमति दे दो
मेरे कंठ को भी थोड़ा गान देदो शारदे
बाबा तुलसी ने पाया, मीरा ने भी खूब गाया
मुझको भी शब्दों का ज्ञान देदो शारदे
अहम को हर लेना बुद्धी ब भर देना
बालक को थोड़ा सा तो मान देदो शारदे
देवेश त्रिपाठी