Faisal Qadri Gunnauri

वो मिसल-ए-हूर होते जा रहे हैं
यूहीं मग़रूर होते जा रहे हैं

मोहब्बत में जो खाये ज़ख्म दिल पर
वो अब नासूर होते जा रहे हैं

हया बाकी नही कुछ तौबा तौबा
अजब दस्तूर होते जा रहे हैं

हिसार-ए-इश्क़ में आया हूँ जब से
अलम काफूर होते जा रहे हैं

जिन्हें चाहा है सारी उम्र हम ने
वो हम से दूर होते जा रहे हैं

तिरी महफिल में आ कर हम भी साकी
बहुत मशहूर होते जा रहे हैं

ख्याल-ए-यार की सहबा से "फ़ैसल"
ये दिल मखमूर होते जा रहे है
Faisal Qadri Gunnauri

Faisal Qadri Gunnauri | We The Sukhanwar