वह बोली, "सावन आया है!"
मैं बोला, "तो ? आया होगा!"
वह बोली देखो खिड़की से
सुबह सुबह कोयल गाती है
मैं बोला ऑफिस जाना है
मुझ पर मैडम चिल्लाती है
वह बोली, "बादल छाया है"
मैं बोला, "तो? छाया होगा!"
घर से ऑफिस के रस्ते में
सावन कहीं नहीं पड़ता है
कभी समय से मैं लड़ता हूँ
कभी समय मुझसे लड़ता है
वह बोली, "मन घबराया है"
मैं बोला, "घबराया होगा!"
एक उम्र में सारे मौसम
एक सरीखे हो जाते हैं
उसने कहा कि इस मौसम में
पौधे तक कजरी गाते हैं
वह बोली, "सबने गाया है "
मैं बोला, "तो? गाया होगा!"
Gyan Prakash Akul