कुछ भी अच्छा बुरा नहीं होताकाम छोटा बड़ा नहीं होतामंज़िलें ख़ुद ब ख़ुद पता देंगी ठान कर देख, क्या नहीं होतागर सताती न चिंता रोटी कीआदमी फिर बिका नहीं होताजु़र्म के सामने 'विमल' क्यों करआज कोई खड़ा नहीं होताVimal kumar vimal