Shivsagar Sahar

गुलाबों में चमेली में न जूही रातरानी में
तुम्हारे बिन कोई ख़ुशबू नहीं है ज़िन्दगानी में

नहीं है याद कुछ तुमको मगर हमने मोहब्बत में
अंगूठी ख़त सभी महफ़ूज़ रक्खी है निशानी में

बड़ा नेता हो या अफ़सर का रुतबा देखकर हरगिज़
बिछाते हम नहीं चादर किसी की मेज़बानी में

भरोसा ख़ुद से बढ़कर आप पर करते थे हम लेकिन
सुना है आप कुछ रहते हैं हर पल बदगुमानी में
Shivsagar Sahar

Shivsagar Sahar | We The Sukhanwar