आज गुलशन में क़यामत की बहार आई है
हर तरफ नूर है इक रंग है रानाई है
सच तो ये है कि मेरी जान पे बन आई है
यार ने ज़ुल्फ़ बड़े प्यार से लहराई है
मुझको ठुकरा के कहीं दूर ऐ जाने वाले
अब तो इस तर्क़-ए-त'अल्लुक में भी रुसवाई है
किसलिए तोड़ दिये प्यार के रिश्ते तुम ने
तुमने क्या दिल को जलाने की कसम खाई है
आज जी भर के तू रिन्दों को पिला दे साक़ी
आज मैख़ाने में सावन की घटा छाई है
मैंने समझा था तुझे भूल गया हूँ लेकिन
ज़िन्दगी फिर तेरे कूचे में मुझे लाई है
दिल-ए-आतिश की कभी आके सदा भी सुनले
क्या ख़बर तुझको मेरी जान पे बन आई है
Aatish Muradabadi