Aatish Muradabadi

ज़िंदगी के दामन में इक ख़ुशी नहीं आई
इस लिए तो चेहरे पर ताज़गी नहीं आई

उस के ही तसव्वुर में जल रहा हूँ मुद्दत से
जाने क्यों उसे मेरी याद ही नहीं आई

तेरे हुस्न की ख़ूबी मैं बयाँ न कर पाया
दर्द-ए-दिल मिला मुझ को शा'इरी नहीं आई

उस की कजरवी आँखें जब से मिल गईं मुझ से
दोस्तों उसी शब से नींद ही नहीं आई

इंतिज़ार दिल को भी मुद्दतों से है जिस का
गुल नहीं खिला 'आतिश' वो कली नहीं आई
Aatish Muradabadi

Aatish Muradabadi | We The Sukhanwar