Ramraj Rajasthani

तुम किधर जाओगे हम किधर जाएँगे
सब गुज़रते गुज़रते गुज़र जाएँगे

उम्र ये ये समाँ क्या रहेगा सदा
वक़्त के साथ पन्ने बिखर जाएँगे

हिज्र में पहले वादों को तुम तोड़ना
बाद में हम वफ़ा से मुकर जाएँगे

अपने घर का पता भूल बैठें कभी
सोचते थे सितारों के घर जाएँगे

हश्र तक साथ किसका रहा है भला
तुम भी मर जाओगे हम भी मर जाएँगे

ख़ूबसूरत बदन ख़ाक हो जाएगा
फूल अपने चमन के बिखर जाएँगे

खोल दूँ मैं अगर कुछ ही रिश्तों के राज़
सारे रिश्तों के चहरे उतर जाएँगे
Ramraj Rajasthani