इक दूसरे से हमने जो पर्दा नहीं किया
ये राज़ था तो राज़ को इफ़शा नहीं किया
ओढ़ा है चादरों की तरह बारहा तुम्हें
लेकिन तुम्हारे साथ में धोका नहीं किया
इल्ज़ाम जो लगाए हैं मुझ पर हुज़ूर ने
ये वो भी जानते हो कि ऐसा नहीं किया
इज़्ज़त बचाने निकले थे दुनिया में जिसकी तुम
उसने तुम्हारे साथ में क्या क्या नहीं किया
अपनी अना के वास्ते झोंका है आग में
घर वालों ने तुम्हारे ये अच्छा नहीं किया
तुमसे भी पहले कोई हमारा न हो सका
तुमने भी छोड़ कर के अजूबा नहीं किया
INAYAT ALI CHISHTI