तुम बिन सारे रिश्ते झूठे
फ़ीका यह संसार
पारसमणि भी पत्थर लगता
सूना हर श्रृंगार
सजनवां तुम हो पहला प्यार!
शीश-महल माटी की ढेरी
वसन रेशमी, शूल
तुम ही पूजा-व्रत और तुम ही
सब ख़ुशियों के मूल
सावन,फागुन रुत वासंती
तुम बिन हैं बेकार
सजनवां तुम हो पहला प्यार!
तुम चातक मैं स्वाति नखत हूँ
या हैं चंद्र-चकोर
जब तक श्वांस चले तब तक को
बँधी हृदय की डोर.
तुम पर तन मन जीवन अर्पित
मेरे राजकुमार
सजनवां तुम हो पहला प्यार!
मन था मेरा कोरा कागज
लिख दी साँची प्रीत
हम दोनों ने संग चुनी है
सपनों की हर भीत
सात जन्म का सात भाँवरों
से पाया अधिकार
सजनवां तुम हो पहला प्यार!
Archana Dwivedi