एक क्षण को भी व्याकुल न होता हृदयमन में बहती सदा हर्ष की रागिनीइस तरह भी न चुभता ये जीवन हमेंआप होतीं हमारी जो अर्धांगिनीMohit Subran (मोहित सुब्रन)