Anis shah anis

रूह उलझन में है बदन के साथ
दिल की बनती नहीं है मन के साथ

वाहवाही तो बाद की है बात
पहले होती घुटन सुख़न के साथ

ज़ख़्म पर तुम नमक मलो कुछ और
आ रहा है मज़ा जलन के साथ

घर पे आकर वो टाँग देता रोज़
अपना किरदार पैरहन के साथ

है बहुत तेज़ लोभ की रफ़्तार
कितना दौड़ोगे तुम हिरन के साथ

आ ही जाता है पद को पा के ग़ुरूर
आ भी जाते फ़ितूर धन के साथ

जो न माँ-बाप का हुआ हो 'अनीस'
क्या करेगा वफ़ा वतन के साथ
Anis shah anis

Anis shah anis | We The Sukhanwar