Aatish Muradabadi

मिलते हैं ज़िन्दगी से बड़ी बे रूख़ी से हम
अब क्या सुनाएँ दास्तान-ए-ग़म किसी से हम

दुनिया के आगे सिर को झुकाकर भी क्या मिला
अब अपना क़द बुलन्द करें शायरी से हम

क्या दौर आ गया है जो रहते थे साथ साथ
अब देखते हैं उनकी तरफ़ बेबसी से हम

तुमने ही तो मिटा दी मेरे दिल की तीरगी
कैसे निकल सकेगें तेरी रौशनी से हम

आजा कि टूट जाये न यह रिश्त-ए-उम्मीद
अब मर न जाएँ यार कहीं बेकसी से हम

आतिश हमें मिला ही नहीं कोई राहबर
बाहर न आ सके हैं यूँ गुमरही से हम
Aatish Muradabadi

Aatish Muradabadi | We The Sukhanwar