सखी रामलल्ला, अवधपुरी आय गये
जिया हरषाय गये ना....
बेर शबरी के वो खाये
चरण केवट से धुलाये
जाति धरम भेद दुनिया से मिटाय गये
जिया हरषाय गये ना....
सारी सृष्टि के खिवैया
पार करिहैं मोरि नइया
मन मा भक्ति कय दियनवां वै जराय गये
जिया हरषाय गये ना....
सबके मन मा बसे राम
तीरथ है अयोध्या धाम
जीत सच के होइ दुनिया का बताय गए
जिया हरषाय गये ना...
बनि गय राम कै मंदिरिया
धन्य भय अवध नगरिया
राम राज फिर से सबहीं क देखाय गए
जिया हरषाय गये ना...
सखी बात हमारि माना
दरसन कय विचार ठाना
भक्ति भाव से जिनिगिया महकाय गए
जिया हरषाय गये ना...
जेहिकै दुनियाँ है दीवानी
बसी उनकी राजधानी
प्रभु अर्चना का भक्ति मा डुबाय गये
जिया हरषाय गये ना
Archana Dwivedi