जब तुम्हारा हाथ मेरे हाथ में था
लग रहा था हर घड़ी सुख की घड़ी थी
मन के मुरझाये कुसुम भी खिल रहे थे
प्रेम को उर में समेटे अवनि-अंबर
दूर नदिया के किनारे मिल रहे थे
कुंडली के सब सितारे पक्ष में थे
ये सकल संसार मेरे साथ में था
जब तुम्हारा हाथ मेरे हाथ में था
किंतु अगले पल तुम्हारा हाथ छूटा
घट गई वह बात जिससे डर रहे थे
स्वप्न का सुंदर नगर बिखरा पड़ा था
स्वप्न आँखों से निरंतर झर रहे थे
आँख के उन आँसुओं की वेदना का
दुःख समाहित उस अँधेरी रात में था
जब तुम्हारा हाथ मेरे हाथ में था
Vishal Samarpit