Santosh sagar

होने लगे है जब से मेरी बात फोन पर
कटने लगे है मेरे भी दिन-रात फोन पर

सीने से जब लगोगे तो समझोगे मेरा ग़म
कैसे बताऊं तुम को मैं हालात फोन पर

बादल किसी की याद का छाया है ज़ेहन में
होती है रोज आखों से बरसात फोन पर

दुनिया की तरह आप भी गुस्सा दिखाते हैं
लड़ने लगे हैं आप भी बे-बात फोन पर
Santosh sagar