Nivedan Mishra

इक नई रहगुज़र से निकले हैं
घर ही जाने को घर से निकले हैं

आए अब दुनिया सामने आए
हम भी बेबाक़ डर से निकले हैं

मेरी मंज़िल को क्यूँ नहीं जाते
रास्ते जो इधर से निकले हैं

ये जो आँसू गिरे हैं आँखों से
लोग मेरी नज़र से निकले हैं
Nivedan Mishra

Nivedan Mishra | We The Sukhanwar