इक नई रहगुज़र से निकले हैं घर ही जाने को घर से निकले हैंआए अब दुनिया सामने आए हम भी बेबाक़ डर से निकले हैंमेरी मंज़िल को क्यूँ नहीं जाते रास्ते जो इधर से निकले हैंये जो आँसू गिरे हैं आँखों से लोग मेरी नज़र से निकले हैंNivedan Mishra