जीवन का गणित

गणित सरीखा जीवन में कुछ कठिनाई, कुछ आसानी है
कुछ प्रश्नों के उत्तर हासिल, कुछ में बस खींचातानी है

जीवन में कुछ जोड़-घटाकर, गुणा-भाग करना पड़ता है
भूल-चूक कुछ हो जाए फिर, जुर्माना भरना पड़ता है
लेकिन कब, क्या, कितना जोड़ें; कब, क्या, कितना घट जाएगा
जीवन में बस वही सुखी है, जो इनके उत्तर पाएगा
गणित में जिसका हाथ तंग है, उसका जीवन बेमानी है
कुछ प्रश्नों के उत्तर हासिल, कुछ में बस खींचातानी है

जीवन लंबा हो या ना हो, बड़ा मगर हो जीवन अपना
कुछ सपनों का घट जाना ही, है कुछ का पूरा हो जाना
किससे, क्या, कितना पाना है; किसको, क्या, कितना देना है
जीवन का यह प्रश्न कठिन है, पर सबको उत्तर देना है
जिसने उत्तर ढूंढ लिया, उसके जीवन में आसानी है
कुछ प्रश्नों के उत्तर हासिल, कुछ में बस खींचातानी है

जीवन का हर पाठ गणित है, हर पन्ने पर प्रश्न लिखा है
अनुभव के विद्यालय में हमने पूछो क्या-क्या सीखा है
अहंकार, डर, लोभ, क्रोध, आलस्य घटाना ही जीवन है
क्षमा, धैर्य, सहयोग, विनय, आनंद ही जीवन का उपवन है
अनासक्ति के पथ पर चलने वाला व्यक्ति ही ज्ञानी है
कुछ प्रश्नों के उत्तर हासिल, कुछ में बस खींचातानी है

कौन लघुत्तम, कौन महत्तम, कौन इसे निश्चित करता है
सब मुझमें हैं, सबमें मैं हूँ, केशव बस इतना कहता है
अर्जुन को गांडीव उठाने का जिसने आदेश दिया है
सब उत्तम हैं, सब पावन हैं, उसने ही उद्घोष किया है
ऊंच-नीच और जात-पात में, बंटना तो बस नादानी है
कुछ प्रश्नों के उत्तर हासिल, कुछ में बस खींचातानी है

तिनका-तिनका जोड़ के पंछी, निर्मित करता एक बसेरा
अंधियारा पल-पल घटता है, फिर आता है सुबह-सवेरा
आसमान का बादल भी कुछ आंखों में सपने गुणता है
फिर हिस्से-हिस्से बंटता है, तब किसान सपने बुनता है
जीवन कुछ पर्वत की भांति, थोड़ा-थोड़ा मैदानी है
कुछ प्रश्नों के उत्तर हासिल, कुछ में बस खींचातानी है

जीवन के संग आयु घटती, बोध-ज्ञान संग जुड़ जाता है
कुछ-कुछ राहें सीधी चलती, कुछ तो रस्ता मुड़ जाता है
नभ से सूरज-चांद ने पूछा, हम सब का जीवन कितना है
मैंने उनको बता दिया, सबके हिस्से का पल बीतना है
सबकी आयु निर्धारित है, जो ना समझे अज्ञानी है
कुछ प्रश्नों के उत्तर हासिल, कुछ में बस खींचातानी है

गणित सरीखा जीवन में कुछ कठिनाई, कुछ आसानी है
कुछ प्रश्नों के उत्तर हासिल, कुछ में बस खींचातानी है
Arun Agrawal