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Mohit Subran (मोहित सुब्रन)
पहन ली है तिरी ख़ातिर तबस्सुम ऐ ज़माने
उदासी को मिरी तू सह न पाया चार दिन भी
Mohit Subran (मोहित सुब्रन)
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