जानिब से तेरी कोई इशारा नहीं हुआ
'सागर' इसीलिए तो तुम्हारा नहीं हुआ
कैसे किसी को होता है ये इश्क़ बार-बार
मुझको कभीभी इश्क़ दुबारा नहीं हुआ
उनको तो अहल-ए-दुनिया कि हर चीज चाहिए
सो उनका मेरे साथ गुज़ारा नहीं हुआ
दरिया की इतनी तेज रवानी की तैरकर
लहरों से कोई शख्श किनारा नहीं हुआ
सब का हुआ है उस से मुझे कोई ग़म नहीं
अफ़सोस है वो शख़्स हमारा नहीं हुआ
बीनाई खो गयी मेरी तन्हा भी हो गया
फिर भी मैं उनके आंख का तारा नहीं हुआ
दरिया में डूबता रहा साहिल की खोज में
कोई भी डूबते का सहारा नहीं हुआ
Santosh sagar