मत आ तू मेरी सम्त सफाई न दे मुझे
चल जा तू इतनी दूर दिखाई न दे मुझे
जब पी रहा था ज़हर कोई रोका तक नहीं
अब मर चुका हूँ अब तो दवाई न दे मुझे
उम्रें गुज़ार दूँ तेरी बाँहों की जेल में
इस जेल से कभी भी रिहाई न दे मुझे
शीशे की तरह तोड़ के बर्बाद कर के दिल
रिश्ते की अपनी और दुहाई न दे मुझे
शोहरत नहीं है ये मेरे महबूब का है ग़म
ऐसी कमाई पे तो बधाई न दे मुझे
इन आँखों से किसी के कोई दुःख न दिख सके
अच्छा तो इस से ये है दिखाई न दे मुझे
ज़ेवर-ज़मीं को बाँट ले वो सब सहूँगा मैं
माँ-बाप को जो बाँटे वो भाई न दे मुझे
जिस से किसी ग़रीब की तौहीन कर दूँ मैं
भगवान इस तरह की कमाई न दे मुझे
Santosh sagar